>भांग तमाखू छूतरा, आफू और सराब।
कौन करेगा बंदगी, य तो भये खराब।।
संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि जो भांग, तम्बाकू छूतरा, अफीम तथा शराब जैसे नशीली वस्तुओं का सेवन करते हैं वह भ्रष्ट हैं। उनकी इज्जत कौन करेगा क्योंकि वह तो बेकार हो गये।
भांग भखै बल बुद्धि को, आफू अहमक होय।
दोय अमल औगुन कहा, ज्ञानवंत नर जाये।।
संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं भांग खाने वाले व्यक्ति कि बुद्धि और दैहिक शक्ति नष्ट हो जाती है। अफीम खाने वाला मूर्ख हो जाता है। ज्ञानी लोगों ने इन दोनों पदार्थों के बहुत सारे अवगुण बताये हैं।
वर्तमान संदर्भ में संपादकीय व्याख्या-पश्चिमी चिकित्सा शास्त्रियों ने तंबाकू, भांग तथा शराब के अनेक दोष बताये हैं। उनके निष्कर्ष तो प्रयोगों पर आधारित होते हैं पर भारतीय विद्वानों ने इनके सेवन करने वालों के चरित्र देखकर यह निष्कर्ष बहुत निकाल लिया था कि इससे मनुष्य की शारीरिक और मानिसक शक्ति का क्षय होता है और धीरे धीरे इनका सेवन करने वाला कायरता, अज्ञानता और आलस्य जैसे विकारों का शिकार हो जाता है। पश्चिमी विशेषज्ञों ने तंबाकू को सेवन इतना खतरनाक माना है कि इसके उपयोग को निरुत्साहित करने के लिये बकायदा एक ‘तंबाकू निषिद्ध दिवस’ घोषित कर दिया है।
इस अवसर पर यह विचार अवश्य करना चाहिए कि जितना हो सके न केवल स्वयं तंबाकू सेवन से बचे बल्कि दूसरों को भी रोकें। वैसे आजकल पाउच के तंबाकू खाने का अधिक प्रचलन हो गया है क्योंकि लोग हाथ में लेकर घिसने की मेहनत से बचना चाहते हैं पर दूसरा यह भी सच है कि उसमें मिले रसायन सामान्य तंबाकू को अधिक खतरनाक बना देेते हैं। सामान्य तंबाकू वाले खाना खाकर उसके बुरे प्रभाव को कम कर लेते हैं पर पाउच खाने वाले तो एक तरह से उनका सेवन रोटी की तरह करते हैं और खाना वगैरह भी कम खाते हैं। विश्लेषणों ये पता लगता है कि युवा वर्ग में इन पाउच से अधिक बीमारिया हो रही है। इस पर प्रतिबंध की मांग सभी करते हैं पर सुनता कोई नहीं। इसका आशय यह नहीं कि सामान्य तंबाकू कोई कम खतरनाक होती है। उससे व्यक्ति का उच्च रक्तचाप बढ़ता है पर इन पाउच वाले तंबाकू को तो कभी खाने की सोचना भी नहीं चाहिए।
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