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सहस्त्रात्पृलुत्य दुष्टेभ्यो दुष्करं सम्पदर्ज्जनम्।
उपायेन पदं मूघर्िल् न्यस्यते मतहस्तिनाम्।।
हिन्दी में भावार्थ-
हजार दुष्टों पर आक्रमण कर भी संपत्ति प्राप्त करना कठिन है पर उपाय किया जाये तो मतवाले हाथी पर भी अपना पैर रखा जा सकता है।
वाळ्मानमयः खण्डं स्कन्धनैवापि कृन्तति।
तदल्पमपि धारावभ्दवतीप्सितसिद्धये।।
हिन्दी में भावार्थ-
कोई मनुष्य कंधे पर बोझा ले जाता है पर वह उसे नहीं काटता पर अगर वह धारवाले लोहे को छू भी ले तो खरोंच आ जाती है। इतना ही नहीं धारवाले से किसी की भी गर्दन काटी जा सकती है।
वर्तमान संदर्भ में संपादकीय व्याख्या–जीवन संघर्ष में बहुत बार मनुष्य को अपने धीरज का परिचय देना होता है। किसी व्यक्ति से विवाद होने पर या कोई संकट सामने आने पर अपनी धीरज कभी नहीं खोना चाहिए। उतावले पन से अपना कार्य या अन्य के साथ व्यवहार करने पर हमेशा आशंका रहती है। बांहों की शक्ति की बजाय वैचारिक अभ्यास के आधार पर अपने कार्य का उपाय ढूंढना चाहिये। अगर सही ढंग से लादा जाये तो आदमी अपने कंधे पर पेड़ खींचकर ले जाता है पर अगर उसी पर बैठकर डालियां काटी जाये तो अपने गिरने का खतरा भी रहता है। किसी एक पेड़ की लकड़ी से इंसान को मारा भी जा सकता है पर जबकि किसी एक पूरे पेड़ को युक्ति पूर्वक घसीटा भी जा सकता है। कहने का अभिप्राय यह है कि किसी लक्ष्य या अभियान को पूर्ण करने के लिये आर्थिक, दैहिक तथा बौद्धिक शक्ति होेते हुए भी उसका योजना पूर्वक उपयोग करने पर ही सफलता मिल सकती है। जहां अतिआत्मविश्वास में सीधे अपना काम शुरु कर दिया वहां सफलता का दावा नहीं किया जा सकता। अतः अपने शिक्षा, व्यवसाय तथा रचनाकर्म के दौरान उत्तेजना अथवा जल्दबाजी से काम करने की बजाय योजना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

संकलक,लेखक एवं संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior
http://anant-shabd.blogspot.com
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