>

कविवर रहीम कहते हैं कि
रहिमन वहां न आइए, जहां कपट को हेत
हम तन ढारत ढेकुली, सींचत अपनो खेत
वहां कतई न जाईये जहां कपट होने की संभावना है। रात भर ढेंकली कोई किसान चलाता रहे पर कोई कपटी उसके खेत का पानी अपनी खेत की तरफ कर ले ऐसा भी होता है।
वर्तमान संदर्भ में व्याख्या-छलकपट तो पहले भी था पर अब तो आधुनिक तरीके आ गये हैं और इस तरह छलकपट होता है कि कई बार पता भी नहीं चलता कि हमने क्या और क्यों गंवाया? पहले तो आमने-सामने ही कपट होता था पर अब तो मोबाइल और इंटरनेट के आने से तो वह व्यक्ति हमारी आंखों के सामने भी नहीं होता जो हमें ठगता है। खासतौर से उन युवक और युवतियों को सजग रहना चाहिए जो अपने लिये जीवन साथी ढूंढते है। यहाँ  तो इतना झूठ बोला जा सकता है कि जिसे पकड़ना संभव ही नहीं है। कोई छद्म नाम रखकर, किसी बड़े परिवार से संबंध बताकर या अपने को बहुत व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत कर धोखा देना बहुत आसान है। इसीलिये कपट से बचने के लिए जितना हो सके सावधानीपूर्वक अपने संबंध बनाने चाहिए। नई तकनीकी ने आजकल धोखे के नये तरीकों को जन्म दिया है जिससे यह आसान हो गया है कि न नाम का पता चले न शहर की जानकारी हो और किसी से भी धोखे का शिकार जाये।
आजकल मोबाईल और इंटरनेट का ज़माना है। इस पर शादी तथा व्यवसाय को लेकर अनेक तरह की धोखेबाजी हो सकती है। ऐसी घटनायें भी सामने आयी हैं कि किसी लड़के ने लड़की को अपना गलत परिचय देकर मित्रता कायम की फिर उसे विवाह का प्रस्ताव दिया। लड़की ने स्वीकार कर लिया और विवाह भी हो गया और बाद में पता चला कि उसके साथाधोखा हुआ है। ऐसे भी प्रकरण आये हैं कि किसी लड़के ने लड़की से पहले घनिष्ट संपर्क बनाया और फिर उसे एक निर्धारित स्थान पर बुलाकर उसके साथ बदतमीजी की।
इसलिये आवश्यकता इस बात की है कि सतर्कता बरती जाये और भले ही इंटरनेट और मोबाईल पर संपर्क हो जाये पर यकीन किसी पर आसानी से नहीं करना चाहिये।

——————–
संकलक,लेखक एवं संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior
http://anant-shabd.blogspot.com
————————

यह पाठ मूल रूप से इस ब्लाग‘दीपक भारतदीप की अंतर्जाल पत्रिका’ पर लिखा गया है। अन्य ब्लाग
1.दीपक भारतदीप की शब्द लेख पत्रिका
2.शब्दलेख सारथि
3.दीपक भारतदीप का चिंतन